har har mahadevb....
अगर सच बताई त भैया लोगन फ़तवा यहु पर होये के चाही .......
"शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।"
मिर्जा गालिब
इसका जवाब लगभग 100 साल बाद मोहम्मद इकबाल ने दिया......
"मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह
नहीं ,
काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं।"
इसका जवाब फिर लगभग 70 साल बाद अहमद फराज़ ने दिया......
"काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर,
खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नहीं।"
इसका जवाब सालों बाद वसी ने दिया......
"खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,
तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं।"
वसी की शायरी का जवाब
साकी ने दिया
"पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,
जन्नत में कौन सा ग़म है इसलिए वहाँ पीने में मजा
नही।"
अगर सच बताई त भैया लोगन फ़तवा यहु पर होये के चाही .......
"शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।"
मिर्जा गालिब
इसका जवाब लगभग 100 साल बाद मोहम्मद इकबाल ने दिया......
"मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह
नहीं ,
काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं।"
इसका जवाब फिर लगभग 70 साल बाद अहमद फराज़ ने दिया......
"काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर,
खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नहीं।"
इसका जवाब सालों बाद वसी ने दिया......
"खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,
तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं।"
वसी की शायरी का जवाब
साकी ने दिया
"पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,
जन्नत में कौन सा ग़म है इसलिए वहाँ पीने में मजा
नही।"

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