तुमको प्यार की ज़रूरत नही थी बे....जोया की ज़रूरत न थी।तुमको तो दोस्त की ज़रूरत थी वही मुरारी जैसा जो बनारस की गलियो में तुम्हारे किये गए कारनामे को छुपाता रहता।



तुम्हे बिंदिया जैसी लड़की की ज़रूर थी बे...जो तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर सकती थी।तू गलत था बे... तुझे जोया की ज़रूरत न थी।
चल अब जा ही रहा है तो फिर मत आना और आना तो बस मुरारी के लिए,बिंदिया के लिए,आना तो बस बनारस के गलियो में घूमने वाले कुंदन के लिये..।
क्योंकि जोया तो फिर वापस आएगी,फिर चली जायेगी,लेकिन मुरारी,बिंदिया,बनारस के घाट,गलियां फिर वापस नही आएंगी।