har har mahadev.....
इधर बनारस यूपी कॉलेज वाले भी काफी हैरत में हैं विद्यापीठ वाले से ज्यादा कोण बदमासी करता है बी एच यू से ज्यादा दंगा कहा होता लेकिन कभी न्यूज़ इतना बड़ा नहीं बना कि आये दिन गुटबाजी हाथ पैर तोड़ टाइप हाकी निकाल के सड़क पे दौड़ा कर पीटने घर मे घुस के बलभर कूटने के बावजूद न मीडिया कवरेज देती न नेता धरना देते
उधर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी वाले पुराने अंतेवासी खुद को ये कहते हुए कोड़े मार रहे हैं, कि साला हर दूसरे दिन एक दूसरे के हॉस्टल में घुस के बम मार के और कट्टा फायर करके भी हम ऑउट ऑफ कवरेज रहे.. और जेएनयू में काली रुमाल पहन के कंटाप मारने पे इतना लोड लिया जा रहा है..
बाबू-शोना और गँवार के बीच का फर्क महसूस करो हिंदी भाषियों.. डीपी अग्रवाल यूपीएससी में सीसैट लगा के तुम्हारा पहले ही काट चुके हैं.. माहौल देख के अगला प्रधानमंत्री हिन्दी मीडियम का होगा ये कहना असम्भव है.. रविशवा अलग से रोज एक पोस्ट लिख के तुम्हें गरिया देता है कि हिंदी प्रदेश कचरा प्रदेश है.. खुद उसको कहो कि आधा घंटा अंग्रेजी पेल के देखे स्टूडियो में तो फट के हाथ मे आ जायेगी.. लुसेंट की जीके के बाद ले दे के एक दबंगई बची थी उसपे भी जेएनयू के जॉनसन बेबी बॉयज़ कब्जा कर रहे हैं.. तुम्हारे लिए अब रेलवे में लोकोपायलट की जगह भी नहीं बची.. उन डूडस की नर्सरी क्लास की दबंगई पे इतने बड़े बड़े नेता कवरेज दे रहे हैं, तुम्हारी बाल्टी भरे बम अब असेम्बली नहीं दहला पाते हैं.. रविशवा सही कहता है कि हिंदी प्रदेश के पाठकों के दिमाग मे गोबर भरा है..
इधर बनारस यूपी कॉलेज वाले भी काफी हैरत में हैं विद्यापीठ वाले से ज्यादा कोण बदमासी करता है बी एच यू से ज्यादा दंगा कहा होता लेकिन कभी न्यूज़ इतना बड़ा नहीं बना कि आये दिन गुटबाजी हाथ पैर तोड़ टाइप हाकी निकाल के सड़क पे दौड़ा कर पीटने घर मे घुस के बलभर कूटने के बावजूद न मीडिया कवरेज देती न नेता धरना देते
उधर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी वाले पुराने अंतेवासी खुद को ये कहते हुए कोड़े मार रहे हैं, कि साला हर दूसरे दिन एक दूसरे के हॉस्टल में घुस के बम मार के और कट्टा फायर करके भी हम ऑउट ऑफ कवरेज रहे.. और जेएनयू में काली रुमाल पहन के कंटाप मारने पे इतना लोड लिया जा रहा है..
बाबू-शोना और गँवार के बीच का फर्क महसूस करो हिंदी भाषियों.. डीपी अग्रवाल यूपीएससी में सीसैट लगा के तुम्हारा पहले ही काट चुके हैं.. माहौल देख के अगला प्रधानमंत्री हिन्दी मीडियम का होगा ये कहना असम्भव है.. रविशवा अलग से रोज एक पोस्ट लिख के तुम्हें गरिया देता है कि हिंदी प्रदेश कचरा प्रदेश है.. खुद उसको कहो कि आधा घंटा अंग्रेजी पेल के देखे स्टूडियो में तो फट के हाथ मे आ जायेगी.. लुसेंट की जीके के बाद ले दे के एक दबंगई बची थी उसपे भी जेएनयू के जॉनसन बेबी बॉयज़ कब्जा कर रहे हैं.. तुम्हारे लिए अब रेलवे में लोकोपायलट की जगह भी नहीं बची.. उन डूडस की नर्सरी क्लास की दबंगई पे इतने बड़े बड़े नेता कवरेज दे रहे हैं, तुम्हारी बाल्टी भरे बम अब असेम्बली नहीं दहला पाते हैं.. रविशवा सही कहता है कि हिंदी प्रदेश के पाठकों के दिमाग मे गोबर भरा है..

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